भारतीय संविधान का विकास - Study Hindi


1773 ईस्वी का रेगुलेटिंग एक्ट

तत्कालीन ब्रिटिश प्रधानमंत्री लॉर्ड नार्थ द्वारा 1772 ई. में गठित गुप्त समिति के प्रतिवेदन पर 1773 में ब्रिटिश संसद द्वारा रेग्युलेटिंग एक्ट पारित किया गया

इसकी मुख्य बाते इस प्रकार है

कंपनी के डायरेक्टर सभी प्रकार के कार्यो से सरकार को अवगत कराय

संचालन मण्डल का कार्यकाल चार वर्ष कर दिया गया

बंगाल में 1774 ई. में एक उच्चतम न्यायलय की स्थापना की गई

बंगाल में एक प्रशासक मण्डल गठित किया गया जिसमे गवर्नर जनरल तथा चार पार्षद नियुक्त किये गए

कानून बनाने का अधिकार गवर्नर जनरल तथा उसकी परिषद को दिया गया
बंगाल के गवर्नर को अब समस्त अंग्रेजी क्षेत्रो का गवर्नर कहा गया

एक्ट ऑफ़ सेटलमेंट, 1781

1781 ई. का एक्ट और सेटलमेंट रेगुलेटिंग एक्ट की त्रुटियों को दूर करने के लिए पारित किया गया था इसे सशोधात्मक अधिनियम भी कहा जाता है

इस एक्ट के द्वारा कलकत्ता की सरकार को बंगाल,बिहार और ओडिशा के लिए भी विधि बनाने का प्राधिकार प्रदान किया गया

इस प्रकार अब कलकाता की सरकार को विधि बनानेके दो स्त्रोत प्राप्त हो गए पहला, रेगुलेटिंग एक्ट के अधीन वह कलकत्ता प्रसिदेंसे के लिए तथा दूसरा एक्ट और सेटलमेंट के अंतर्गत बंगाल, बिहार तथा ओडिशा के दीवानी प्रदेशो के लिए विधि बना सकती थी

इस अधिनियम के द्वारा न्यायलय के अधिकार क्षेत्र परिभाषित कर दिए गए कंपनी के पदाधिकारियों द्वारा अपने शासकीय रूप में किये गए कार्यो के लिए वे सर्वोच्च न्यायायलय के अधिकार क्षेत्र से बहार कर दिए गए

इस अधिनियम के औसर सर्वोच्च नययाय्लय को अपनी आज्ञाए  तथा आदेश लागु करते समय भारतीये के धार्मिक तथा सामजिक रीती रीतिरिवाजो को ध्यान में रखना अनिवार्य कर दिए गया
साथ ही गवर्नर जनरल एवं उसकी परिषद् द्वारा बनाये गए नियमो एवं विनियमों को सर्वोच्च न्यायायलय के पास पंजीकृत करने की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई

1784ई. का पिट्स इंडिया एक्ट

छः कमिश्नरो के एक नियंत्रण बोर्ड की स्थापना की गई जिसे भारत में अंग्रेजी अधिकृत क्षेत्र पर पूरा अधिकार दिया गया इसे बोर्ड ऑफ़ कण्ट्रोल कहा जाता है

बम्बई तथा मद्रास के गवर्नर पूर्णरूपेण गवर्नर जनरल के अधीन कर दिए गए तथा बम्बई और मद्रास के गवर्नर की सहायता के लिए तीन-तीन सदस्यीय परिषदों का गठन किया गया

भारत में गवर्नर जनरल की परिषद् की सदस्य संख्या चार से घटाकर तीन कर दी गई

देशी राजाओ से युद्ध तथा संधि से पहले गवर्नर जनरल को कंपनी के डायरेक्टर से स्वीकृति लेना अनिवार्य कर दिया गया

भारत में अंग्रेज अधिकारियो के ऊपर मुक़दमा चलने के लिए इंग्लैंड में एक कोर्ट की स्थापना की गई
भारत में कंपनी के अधिकृत प्रदेशो को पहली बार नया नाम ‘ब्रिटिश अधिकृत भारतीय प्रदेश’ दिया गया

1786 का अधिनियम

इस अधिनियम के द्वारा गवर्नर जनरल को प्रधान सेनापति की शक्तिया प्रदान की गई तथा साथ ही गवर्नर जनरल को विशेष परिस्थितियों में अपनी परिषद् के निर्णयों को रद्द करने तथा अपने निर्णय लागु करने का अधिकार दिया गया

1793 का चार्टर एक्ट

कंपनी के व्यापारिक अधिकार को अगले 20 वर्षो के लिए बाधा दिया गया
शासको के व्यक्तिगत नियमो की जगह ब्रिटिश भारतीय क्षेत्र में लिखित विधि विधानों द्वारा प्रशासन की आधारशिला रखी गई

गवर्नर जनरल एवं गवर्नर की परिषदों के सदस्यों की योग्यता के लिए सदस्य को कम से कम 12 वर्षो तक भारत में रहने के अनुभव को आवश्यक कर दिया गया

नियंत्रक मण्डल के सदस्यों को भारतीय राजस्व से वेतन देने का प्रावधान किया गया
सभी कानूनों एवं विनियमों की व्याख्या का अधिकार न्यायलय को दिया गया

1813 का चार्टर अधिनियम


कंपनी के भारतीय व्यापारिक एकाधिकार को समाप्त करके अन्य ब्रिटिश प्रजाजनों को भी ब्यापार का अधिकार प्रदान किया गया

कंपनी को और अगले बीस वर्षो के लिए भारतीय प्रदेशो तथा राजस्व पर नियंत्रण का अधिकार प्रदान किया गया

नियंत्रण बोर्ड की शक्ति को परिभाषित किया गया तथा उसका विस्तार भी कर दिया गया
इसाई मिशनरियो को भारत में धर्म प्रचार की अनुज्ञा दी गई

कंपनी को गवर्नर जनरल ,गवर्नरो तथा प्रधान सेनापतियो को नियुक्त करने का अधिकार दिया गया

1833 का चार्टर अधिनियम


कंपनी के व्यापारिक एकाधिकार को समाप्त करके उसे प्रशासनिक तथा राजनितिक संस्था बना दिया गया

कंपनी के नियंत्रक मण्डल के अधिकार को सिमित किया गया

बंगाल के गवर्नर जनरल को सम्पूर्ण भारत का गवर्नर जनरल बनाया गया

गवर्नर जनरल की परिषद् को सम्पूर्ण भारत के लिए कानून बनाने का अधिकार प्रदान किया गया
भारत में दास प्रथा को गैरकानूनी घोषित किया गया

कंपनी के प्रदेशो में निवास करने वाले भारतीय या ब्रिटिश प्रजाजनों को धर्म,जन्मस्थान मूल वंश या रंग के आधार पर कंपनी के पद धारण करने के लिए अयोग्य न ठहराने जाने के प्रावधान किये गए

1853 का चार्टर अधिनियम

ब्रिटिश संसद को किसी भी समय कंपनी के भारतीय शासन को समाप्त करने का अधिकार प्रदान किया गया

]कार्यकारिणी परिषद् के कानून सदस्य को परिषद् का पूर्ण सदस्य बना दिया गया

निदेशक मण्डल में सदस्यों की संख्या 24 से कम कर दी गई तथा इनमे से 6 सदस्यों की नियुक्ति करने का अधिकार ब्रिटिश राजा को प्रदान किया गे निदेशन मण्डल के सद्यो के लिए योग्यता विहित की गई

कंपनी के कार्मचारियो की नियुक्ति के लिए प्रतियोगी परीक्षा की व्यवस्था की गई

बंगाल के लिए पृथक लेफ्टिनेंट गवर्नर की नियुक्ति की गई

गवर्नर जनरल को अपनी परिषद् के उपाध्यक्ष की नियुक्ति का अधिकार प्रदान किया गया

1858 का भारत शासन अधिनियम

भारत में कंपनी के शासन को समाप्त कर दिया गया तथा शासन का उतरदायित्व ब्रिटिश सरकार को सौप दिया गया

कंपनी के निदेशक मण्डल. नियंत्रक मण्डल तथा गुप्त समिति को समाप्त करके इनके अधिकारों तथा शक्तियों के प्रयोग का अधिकार ब्रिटेन की सम्राज्ञी की और से भारत राज्य सचिव को सौप दिया गया

भारत राज्य सचिव के कार्यो में सहायता देने हेतु 15 सदस्यों की एक भारत परिषद् की स्थापना की गई

भारत के गवर्नर जनरल का नाम वायसराय कर दिया गया

कंपनी की सेनाओ को ब्रिटिश शासन के अधीन कर दिया गया

भारतीय परिषद् अधिनियम ,1861

गवर्नर जनरल को नियम बनाने का अधिकार प्रदान किया गया

गवर्नर जनरल को अध्यादेश जारी करने का अधिकार दिया गया

गवर्नर जनरल को विधायी कार्यो हेतु  नय प्रान्त का निर्माण का तथा नवनिर्मित प्रान्त में लेफ्टिनेंट गवर्नर  को नियुक्त करने का अधिकार दिया गया

केंद्रीय कार्यकारिणी के सदस्यों की संख्या 4 से बढाकर 5 कर दी गई
गवर्नर जनरल की विधान परिषद् की संख्या में वृद्धि की गई

1865 का अधिनियम

गवर्नर जनरल के विधायी अधिकार में वृद्धि की गई गवर्नर जनरल को प्रेसिडेंसी तथा प्रान्तों की सीमओं को उद्घोषणा द्वारा नियत करने तथा उसमे परिवर्तन कने का अधिकार दिया गया

1869 का अधिनियम


इस अधिनियम द्वारा गवर्नर जनरल को विदेश में रहने वाले भारतीय को सम्बन्ध में कानून बनाने का अधिकार दिया गया

1873 का अधिनियम

किसी भी समय ईस्ट इंडिया कंपनी को भंग किया जा सकता है इस नियम के अनुसरण में 1 जनवरी 1874 को ईस्ट इंडिया कंपनी को औपचारिक रूप से भंग कर दिया गया

शाही उपाधि अधिनियम ,1876

औपचारिक रूप से भारत सरकार का ब्रिटिश सरकार को अंतरण मानी किया गया
गवर्नर जनरल की परिषद् में छठे सदस्य की नियुक्ति की गई जिसे लोक निर्माण विभाग का कार्य सौपा गया

28 अप्रैल 1876 को एक घोषणा द्वारा महारानी विक्टोरिया को भारत की सम्राज्ञी घोषित किया गया

भारतीये परिषद् अधिनियम ,1892

केन्द्रीय विधान परिषद् में अतिरिक्त सदस्यों की संख्या में वृद्धि की गई

केंद्रीय तथा प्रांतीय विधान पारिषद के दो तिहाई सदस्यों को निर्वाचन द्वारा नियुक्त किये जाने की व्यवस्था की गई

केन्द्रीय तथा प्रांतीय विधान परिषदों के अधिकार क्षेत्र में वृद्धि की गई

परिषदों को राजस्व और व्यय के वार्षिक कथन अर्थात बजट पर विचार विमर्श करने की और कार्यपालिका से प्रशन पूछने की शक्ति दी गई

भारतीय परिषद् अधिनियम ,1909

1905 में ब्रिटेन में संपन्न आम चुनाव में उदारवादी सरकार का गठन हुआ और लॉर्ड मार्ले भारत मंत्री तथा लॉर्ड मिन्टो की सिफारिश के आधार पर 1909 का अधिनियम जिसे मार्ले मिन्टो सुधर भी कहा जाता है

केंद्रीय विधान परिषद् की कुल सदस्य संख्या 69 (60 सदस्य और 9 पदेन सदस्य )की गई जिसमे 37 सरकारी और 32 गैर सरकारी सदस्य थे

प्रांतीय विधान परिषदों किशंख्या में वृद्धि की गई

सर्वप्रथम पहली बार पृथक निर्वाचन व्यवस्था का प्रारंभ किया गया साथ ही मुसलमानों को प्रतिनिधित्व के मामले में विशेष रियायाय्त दी गई

गवर्नर जनरल की कार्यकारिणी में एक भारतीय सदस्य को नियुक्त करने की व्यवस्था की गई
विधान परिषदों के विचार विमर्श के कृत्यों में भी वृद्धि हुई इससे उन्हें यह अवसर दिया गया की वे बजट या लोकहित के किसी विषय पर संकंप प्रस्तावित करके प्रशासन की निति पर प्रभाव दाल सके | कुछ विनिर्दिष्ट विषय इसके बहार थे जैसे –सशस्त्र बल, विदेश कार्य और देशी रियासते

भारत शासन अधिनियम ,1919 या मौन्तेग्यु चेम्सफोर्ड प्रतिवेदन

केंद्र में द्विसदनात्मक विधैयका की स्थापना की गई
1 राज्य परिषद्
2 केंद्रीय परिषद्
केन्द्रीय विधानसभा के सदस्यों का चुनाव प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा किया गया
भारत राज्य सचिव का वेतन अंग्रेजी राजस्व से देना निर्धारित किया गया
भारत के आठ प्रान्तों में विधान परिषदों का गठन किया गया

प्रांतीय मंत्रिमंडल को अत्यंत सिमित अधितकर प्रदान किया गया

प्रांतीय अधिकारिता के विधायो को दो भागो में विभाजित कर द्वेध शासन का प्रारंभ किया गे
ये विषय थे – आरक्षित विषय ठाठ हस्तांतरित विषय

भारत सरकार अधिनियम ,1935

1935 ई. में भारत सरकार अधिनियम पारित किया गया जिसमे 321 अनुच्छेद तथा 10 अनुसूचिय थी

अखिल भारतीय संघ का प्रस्ताव किया गे जिसमे ब्रिटिश भारत के प्रान्त का सम्मिलन अनिवार्य किन्तु देशी रियासतों का सम्मिलन उनके नरेशो की इक्षा पर निर्भर था

संघ तथा केंद्र के बीच शक्तियों का इभाजन किया गया

केंद्र में द्वेध शासन की स्थापना  की गई | केंद्रीय सरकार के विषयो को दो भागो में बांटा गया
1 संरक्षित विषय    2 केन्द्रीय विधानसभा

प्रान्तों में द्वेध शासन को समाप्त करते हुए स्वशासन स्थापित किया गया

भारत के 11 प्रान्तों में विधानसभाओ का गठन किया गया

प्रांतीय शासन के अध्यक्ष के रूप में राज्यपाल की नियुक्ति की गई

प्रांतीय विधैयका को प्रांतीय सूचि तथा समवर्ती सूचि पर कानून बनाने का अधिकार दिया गया
गवर्नर जनरल को व्यापक शक्तिया प्रदान की गई

भारत राज्य सचिव की परिषद् को समाप्त करते हुए उसे मंत्रणा देने के लिए परामर्शदाता की व्यवस्था की गई

भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम ,1947


भारत के तत्कालीन वायसराय लॉर्ड माउन्टबेटेन द्वारा तैयार माउन्टबेटन योजना को क़ानूनी रूप देने के उद्देश्य से ब्रिटिश संसद ने 18 जुलाई 1947 को भारतीय स्वतंत्र अधिनियम पारित किया

15 अगस्त 1947 से दो स्वतंत्र डोमिनियन स्थापित किये जायेंगे जो भारत और पाकिस्तान के नाम से जाने जायेंगे

बंगाल तथा पंजाब के दो दो प्रान्त बनाए जाने का प्रस्ताव किया गया पाकिस्तान को मिलने वाले क्षेत्रो को छोड़कर ब्रिटिश भारत में सम्मिलित सभी प्रान्त भारत में सम्मिलित मने गई
पूर्वी बंगाल , पश्चिमी बंगाल और असम के सिलहट जिले को पाकिस्तान में सम्मिलित किया जाना था
भारत के महामहिम की सरकार का उतरदायित्व तथा भारतीय रियासतों पर महामहिम का अधिराज्स्व 15 अगस्त 1947 को समाप्त हो जायेगा

प्रत्येक डोमिनियन के लिए एक पृथक गवर्नर जनरल होहा जिसे महामहिम द्वारा नियुक्त किया जायेगा गवर्नर जनरल दोमिनियम की सरकार के प्रयोजनों के लिए महामहिम का प्रतिनिधित्व करगा
प्रतेयक डोमिनियन के लिए एक पृथक विधानमंडल होगा जिसे विधियों को बनाने का पूरा प्राधिकार होगा तथा ब्रिटिश संसद उसमे कोई हस्तक्षेप[ नहीं कर सकेगी

उन समस्त संधियों एवं अनुबंधों को रद्द कर दिया जायेगा ,जो महामहिम की सरकार तथा भारतीयों राजाओ के मध्य हुए थे

भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम को क्रियान्वित करने के लिए गवर्नर जनरल को अस्थायी आदेश जारी करने का अधिकार प्रदान किया गया

इस प्रकार ,भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 के अनुसार `14-15 अगस्त को पाकिस्तान तथा भारत नामक दो डोमिनियन का गठन कर दिया गया|   

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