पृथ्वी का आंतरिक स्वरुप | Internal structure of earth


पृथ्वी का आंतरिक स्वरुप

Geography in hindi
आज हमलोग जानेंगे पृथ्वी के आंतरिक स्वरुप के बारे में जानेंगे हमलोग पृथ्वी के ऊपर तो भली भांति जानते है जिसमे घर पेड़ पौधे नदिया और कई देश कई शहर और कई गाँव है पर शायद ही कुछ लोग जानते पृथ्वी के आंतरिक भाग को जानते होपंग मेरे ख्याल से लोग सोचते भी होंगे की पृथ्वी के अन्दर आखिर है का कुछ लो अनुमान स्वरुप बताते होंगे की धरती के अन्दर पानी ही चलिए तो शुरू करते है कुछ जानकारी आपलोगों के साथ साझा करते है

पहली बात –पृथ्वी तीन परतो में विभाजित है
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1. भूपर्पटी – पृथ्वी की बाहरी या उपरी पट्टी या परत को भूपर्पटी कहते है और यह सबसे पतली परत हिया और इसकी मोटाई लगभग 5 से 40 km होती है
महासागरीय – 5 km
महाद्वीपीय  -- 40 km
महाद्द्विपीय भूपर्पटी हलकी और भरी शैलो के मिश्रण से बना है इसलिए ये कम सघन है जबकि महासगरिये भूपर्पटी अधिकतर सघन शैलो बेसाल्ट से निर्मित है

2. मेटल – मेंटल की मोटाई 2900 km है यल दो भागो में बता है उपरी मेंटल और निचली मेंटल

3. क्रोड – पृथ्वी की सबसे अन्दर की परत क्रोड कहलाती है और धातुओ से बने होने के कारण इसे धात्विक क्रोड भी कहते है



क्रोड भी दो भागो में विभाजित है

a—ब्रह्य क्रोड – लोहे से बनी तरल अवस्था में है

b आंतरिक क्रोड – लोहे और निकिल से बनी ठोस अवस्था में है

स्थल मण्डल

स्थालमंडल की ठोस परत भूपर्पटी और उपरी मेंटल में बना है
पृथ्वी की भूपर्पटी पर प्रचुरता से पाए जाने वाले स्थालमंडल के कुछ तत्व है ----सिलिका, ऑक्सिजन , लोहा , एलुमिनियम

शैल –शैल प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले खनिजो के मिश्रण है कुछ शैल में केवल एक ही प्रकार के खनिज पाए जाते हिया परन्तु अधिकतर खनिज में दो या दो से अधिक खनिज पाए जाते है

शैल तीन प्रकार के होते है
1. आग्नेय – ये शैल गर्म लावा या मैग्मा से बनती है पृथ्वी पर आग्नेय शैल सबसे अधिक मात्र में पी जातियो है क्योंकि पृथ्वी जाति है क्योंकि पृथ्वी की भूपर्पटी का दो तिहाई भाग इन्ही शैलो से बना है इन्हें प्राथमिक शैल या मूल शैल भी कहते है
जैसे – ग्रेनाईट या बेसाल्ट


2. अवसादी =- कभी कभी शैल कई प्रकार से छोटे छोटे टुकड़े में टूट जाति है तथा अवसादो का निर्माण करती है जैसे बजरी , बालू तथा गाद में और यही अवसाद निचली क्षेत्र में संपीडित होकर अवसादी शैल का निर्माण करती है ये शाले मुलायम होती है
उद्धरण – बलुआ पत्थर, चुना पत्थर, कौयला इत्यादि

3. कयांतित पत्थर- आग्नेय और अवसादी शैलो में दबाव एवं ऊष्मा के कारण रासायनिक एवं संरचनात्मक परिवर्तन होते है जिससे कायांतरित शैल का निर्माण होता है ये मूल शैल से भिन्न होते है
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