physcal characteristics of india | भारत के भौतिक लक्षण

physcal characteristics of india | भारत के भौतिक लक्षण

indian geography in hindi
भारत एक विशाल देश है इसका क्षेत्रफल 32.8 लाख वर्ग किलोमीटर है यह संसार का सबसे बड़ा लोकतंत्र है यंहा बहुत सी विव्ध्ताये है

भारत की ग्लोब की स्थिति | Status in india globe | Bharat ki globe me sthiti


विषुवत वृत्त के उत्तर में स्थित होने के कारण व्हारत उत्तरी गोलार्ध के अंतर्गत आता है कर्कवृत्त देश के लगभग दो सामान भागो में विभाजित करता है इसका दक्षिणी भाग जिसमे प्रायद्वीपीय भारत सम्मिलित है उष्ण कटीबंध में आता है तथा उत्तरी अध भाग जिसकी प्रकृति लगभग महाद्वीपीय है उपोषण कटीबंध में है

प्रधान मध्याह्म रेखा के पूर्व में स्थित हिने के कारण भारत पूर्वी गोलार्ध में भी आता है
भारत एशिया महाद्वीप के दक्षिण मध्य प्रायद्वीप में है  एशिया संसार का सबसे बड़ा तथा सबसे अधिक जनसँख्या वाला महाद्वीप है
सन 1885 में स्वेज नहर के खुलने से भारत और यूरोप के बीच की दुरी 7000 km कम हो गई है

भारतीय महा द्वीप | Indian continent |Bhartiye upmahadveep 

भारतीय उपमहाद्वीप में आज के देश है
उतर-पश्चिम में पाकिस्तान ,केंद्र में भारत ,उतर में नेपाल और चीन ,उतर पूर्व में भूटान तथा पूर्व में बांग्लादेश भारत की सीमा इन देशो से मिलती है

भारतीये उपमहाद्वीप की कहानी |Story of the Indian subcontinent | Bhartiye upmahadveep ki kahani


यह कहानी में लाखो करोड़ो वर्ष पहले भूविज्ञान अतीत में ले जाति है

जंहा आज हिमालय और भारत के उतारी मदन है वंहा कभी टेथिस सागर होता था दो विशाल खंडो में घिरा यह एक लम्बा और उठला सागर था इसके उतर में ‘अंगारा लैंड” तथा दक्षिण में ‘गोडवाना लैंड’ नाम के डॉ भूखंड थे

टेथिस सागर भारत और म्यांमार की वर्तमान सीमा से लेकर पश्चिम में दक्षिण अटलांटिक महासागर की गिनी की खाड़ी तक विस्तृत था इसमें पश्चिम एशिया तथा अफ्रीका के उतर पूर्वी तथा मध्य भाग सम्मिलित थे
लाखो वर्ष तक इन दो भूखंडो का अपरदन होता रहा तथा अपरदित पदार्थ कंकर पत्थर मिटटी गड आदि टेथिस सागर में जमा होते रहे दो विशाल भूखंड धीरे धीरे लेकिन लगातार एक दुसरे की और खिसकते रहे इस प्रकार इस सागर पर दो विरोध दिशाओ में लगातार भारी क्षेतिज दबाव पर रहा था परिणामस्वरूप यह सिकुड़ने लगा तथा इसमें जमी मिटटी आदि की परतो में (वलय) मोड़ पड़ने लगे यह वलय पहले द्वीप की एक श्रृंखला के रूप में उभरे और लाखो वर्षो में विशाल वलित पर्वत श्रेणियों का निर्माण हुआ इन्ही में से आज हिमालय भी है

भारत के प्रमुख भू – आकृतिक विभाग |Major Geographical Departments of India

दो प्रीचिं भूखंडो के टकराने के परिणामस्वरूप एक सुगठित भारतीय  उप महाद्वुपीय का निर्माण हुआ

भारत के पांच भू- आकृतिक विभागों में बांटा जाता है

1 उतर में विशाल पर्वतो की प[रचिर
2 उत्तरी मैदान
3 विशाल प्रायद्वीपीय पठार
4 तटीय मैदान
5 भारतीय द्वीप 

उतर में विशाल पर्वतो की प्राचीर |Ramparts of the huge mountain in the north | utar me vishal parvat ki prachir

भारत से कुछ ही दुरी पर मध्य एशिया में विख्यात ‘पार्मिर का ग्रंथि “ है इसे प्रायः संसार की छत के नाम से पुकारा जाता है इससे अनेक पर्वत श्रेणियों निकलती है इनमे से एक कुनलुन है जो पूर्व की और तिब्बत में चली जाती है दूसरी पर्वत श्रेणी काराकोरम कश्मीर में प्रवेश कर दक्षिण पूर्व की और बढती है इसी में अकसाईंचीन का पठार है पूर्व में आगे चलकर तिब्बत में चली जाती है इसी में संसार की दूसरी सबसे ऊँची पर्वत चोटी या शिखर k2 स्थित है
इस भाग में विशाल हिमानिय है हिमानी ठोस बर्फ और हिम की खिसकती हुई नदिया है
बल्टोरो और सियाचिन इस क्षेत्र की प्रमुख नदिया है

हिमालय |Himalaya


हिमालय नविन वलित पर्वत है सामान्यतः इसपे तीन स्पष्ट पर्वत श्रेणिया है    

सबसे उतरी पर्वत श्रेणिया सबसे ऊँची श्रीनि को सर्वोच्च हिमालय या हिमाद्री है

एवरेस्ट शिखर सागरमाथा संसार का सरवोछ शिखर है इसकी ऊंचाई 8848 m है यह नेपाल में है कन्चंजुन्गा दुनिया का दूसरा सबसे ऊँचा पर्वत शिखर है यह सिक्किम राज्य में स्थित है
सर्वोच्च हिमालय के दक्षिण में मध्य या लघु हिमालय है इसे हिमाचल श्रेणी कहती है सभी प्रमुख पर्वतिये नगर जैसे डलहौजी ,धर्मशाला ,शिमला ,मसूरी ,नैनीताल,और दार्जलिंग इसी पर्वत श्रेणी में है
हिमालय के दक्षिणतम श्रेणी को ब्रह्य हिमालय या शिवालिक श्रेणी कहा जाता है यह पर्वत श्रेणी जलोढ़ अवसादो से बनी है इसकी शैले ठोस नहीं है इस भाग में प्रायः भूकंप आते है और भूस्खलन होता मृदा अपरदन सबसे अधिक हिमालय की इस सर्वाधिक युवा श्रेणी में होता होता है
हिमालय में अनेक अदि बड़ी नदिया निकलती है वे उत्तरी मैदान में बहती हुई अरब सागर या बंगाल की खाड़ी में गिर जाति है वंहा एक सर्वाधिक रोचक तथ्य अह है की भारतीय उपमहाद्वीप की टिक प्रमुख नदिया सुन्धु सतलुज तथा ब्रह्पुत्रा हिमालय के उस पार से निकलती है इस नदियों का उद्गम क्षेत्र तिब्बत में कैलाश और मानसरोवर  के निकट है

ब्रहमपुत्र हिमालय की पूर्वी सीमा बनती है भारत की पूर्वी सीमा पर फैले पर्वतो को पूर्वांचल कहते है ये पर्वत हिमालय की भांति विशाल नहीं है ये माध्यम ऊंचाई के पर्वतो को पूर्वांचल कहते है इस पर्वतो के अंतर्गत उत्तर की पटकई  बूम और नागा पहाडियों तथा दक्षिण की मिजो पहाडियों आती है मध्य में ये पहाड़िया पश्चिम के सीमा के साथ फैली है यंहा इन्हें पूर्व से पश्चिम की ओर जैंतिया खासी और गारो के नाम से जाना जाता है

उत्तरी मैदान | Northern plain | Uttari maidan


भारत का उत्तरी मैदान उत्तर में हिमालय तथा दक्षिण में प्रायद्वीपीय पठार से निकलने वाली नदियों द्वारा लाई हुई बारीक़ गाद से बना है एसी मिटटी को जलोढ़क कहते है इसलिए इस समतल मैदान को जलोढक मैदान कहते है

उत्तरी मैदान को दो नदी तंत्र में विभाजित किया जाता है

पश्चिम में सिन्धु नदी तंत्र तथा पूर्व में गंगा ब्रह्मपपुत्र का नदी तंत्र है

सिन्धु द्रोणी | Indus Basin |Sindhu droni

सिन्धु द्रोणी का अधिकतर भाग भारत के जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और पंजाब राज्यों में है सिन्धु नदी की लम्बाई लगभग 2900 km है सतलुज ,व्यास ,रावी,चिनाद, और झेलम इसकी प्रमुख नदिया सहयाके नदिया है

गंगा द्रोणी | Ganges Basin | Ganga droni

गंगा की हिमालय में दो शीर्ष नदिया है –भागीरथी और अलकनंदा
दोनों देवप्रयाग के मिलती है और इनकी संयुक्त धारा यंहा से गंगा के नाम से बहती है गंगा हरिद्वार के पास उत्तर भारत के मैदान  में प्रवेश करती है यमुना इससे इलाहाबाद में मिलती है यमुना में दक्षिण की ओर से चम्बल ,सिंद , बेतवा , और केन नमक सहायक नदिया मिलती है ये सभी नदिया मैदान में प्रवेश करने से पूर्व मालवा के पठार से होते हुए बहती है
दक्षिण के पठार से आकर सीधे गंगा में मिलने वाली एक मात्र बड़ी नदी सोन है

ब्रह्मपुत्र घाटी | Brahmaputra Valley

brahmaputr ghaatee
ब्रह्मपुत्र का उद्गम स्थल भी तिब्बत में सिन्धु और सतलुज के उदगम के निकट ही है यह नदी बड़ी भारी मात्रा में जल बहाकर लाती है तिब्बत में यह  हिमालय के समनांतर बहती है जंहा इसका नाम सान्ग्पो है
लोहित , दिहांग ,तथा दिबांग के संगम के बाद इसका नाम ब्रहमपुत्र पड़ता है
बांग्लादेश के उत्तरी भाग में इसका नाम जमुना है मध्य भाग में गंगा से मिलने के बाद इसे पद्मा कहते है दक्षिण में मुख्य धारा से मेघना आकर मिलती है और इनकी संयुक्त धारा मेघना कहलाती है

गंगा – ब्रहमपुत्र डेल्टा | Ganga Brahmaputra Delta

यह संसार का सबसे बड़ा तथा सबसे तेजी से बढ़ने वाला डेल्टा है काफी मात्रा में जल सुलभ होने के साथ साथ यह सबसे उपजाऊ भी है गंगा और ब्रहमपुत्र अपने निचले भाग में अनेक वितरिकाओ में बाँट जाति है ढल के मंद होने के कारण नदियों की गति बहुत धीमी हो जाति है तथा धारा के मध्य में जलोढ़ मृदा के द्वीप अन जाते है समे आए अवरोधों को पार करते समय नदी और अधिक धाराओ में बटती जाती है इस कर्म की पुर्रवृति होती रहती है तथा इस प्रकार एक डेल्टा की विशेष आकृति का निर्माण होता है द्व्लता का निचला स्तर जंहा ज्वर भाते के समय समुद्र का जल ताजे पानी के साथ मिलता  रहता है दलदली है

विशाल प्रायद्वीपीय पठार |Huge peninsular plateau

vishaal praaydveepeey pathaar
उत्तरी मैदानों के दक्षिण में भारत का विशाल प्रायद्वीपीय पठार विस्तृत है यह भारतीय महाद्वीपीय का सबसे प्राचीन भाग है
इस भूभाग के उत्तर तथा उत्तर पूर्व की दिशाओ में निरंतर तथा धीरे धीरे खिसकने के परिणामस्वरूप ही टेथिस सागर के स्थान पर हिमालय और उत्तरी मैदानों की उत्पति हुई
प्रय्द्विपिय पठार को दो भागो में विभाजित किया जाता है
1 मध्यवर्ती उच्चभूमि
2 दक्कन का पठार
मध्यवर्ती उच्चभूमि –प्रायद्वीपीय भूभाग के उत्तरी भाग को मध्यवर्ती उच्चभूमि कहते है
यह भाग कठोर आग्नेय तथा कायांतरित शैलो का बना हुआ है पश्चिम की ओर बहने वाली नर्मदा नदी ने इस भूखंड को दो भागो में विभाजित कर दिया है
उत्तरी भाग की एक सीमा पर विध्यांचल तथा उसके पूर्वी विस्तार है उतर पश्चिम में यह अरावली पर्वत श्रेणी से घिरा है
उत्तर तथा उत्तर पुर की और यह उच्च भूमि धीरे धीरे गंगा के मैदान में विलीन हो जाति है इस भूभाग को मालवा का पठार कहते है यह पठार पश्चिम में काफी चौरा है तथा पूर्व की और तंह होता जाता है इसके पूर्वी भाग को दक्षिण उत्तर प्रदेश में बुंदेलखंड तथा   बघेलखंड के नाम से पुकारते है दक्षिण बिहार में यह छोटानागपुर के पठार के नाम से जाना जाता है

दक्कन का पठार |Deccan Plateau |dakkan ka pathaar

विध्यांचल पर्वत श्रेणी से प्रायद्वीप के दक्षिण छोर के मध्य दक्कन का पठार विस्तृत है इसकी आकृति त्रिभुज के समान है उत्तर में इसकी चौराई सबसे अधिक है दक्कन के पठार की उत्तरी सीमा ज्पर विध्यांचल पर्वत श्रेणी तथा इसका पूर्वी विस्तार अर्थात महादेव पहाड़िया ,कैमूर पहरिया और मैकन श्रंखला है इसके पश्चिम पश्चिमी घाट है पश्चिम की ओर इनका बहुत ही खड़ा ढाल है
दक्कन के पठार की ऊंचाई पशिचिम मै अधिक है पूर्व में बंगाल की खाड़ी की और इसका ढल कम होता है अन्नामुदी इसका सर्वोच्च शिखर है समुद्रतल से इसकी ऊंचाई 2695 m है

तटीय मैदान | Coastal Plain |Tatiye maidan

दक्कन के पठार के पूर्व और पश्चिम में तटीय मैदान फैले है पश्चिम तटीय मैदान का विस्तार गुजरात से केरल तक है अरब सागर की ततिये पति को उत्तरी भाग में कोंकण तथा गोवा के दक्षिण में मालाबार के नाम से पुकारते है इस तट पर अनेक ज्वारंद्मुख प्रमुख है इस तट पर मुम्बई और मर्मगोआ जैसे अनेक गहरे ज्प्रकृतिक पोताश्रय है इसके दक्षिणी भाग में अनेक खरे पानी की झीले है जिन्हें लैगून या पश्च्जल कहते है

भारतीय द्वीप |Indian islands |Bhartiye dveep


केरल के पश्चिम में लक्षद्वीप स्थित है इसमें छोटे छोटे अनेक द्वीप है इनका निर्माण अल्पजीवी सूक्ष्म प्रवाल जीवो की सतत और शांत प्रयत्नों के द्वारा हुआ है ये प्रवाल जिव उथले एवं कोष्ण कीचड़ जल में ही हाली भांति पनपते है इनमे से अनेक द्वीपों की आकृति घोड़े की नाल या अंगूठी के सामान है इन्हें एतौल या प्रवालद्वीप वलय कहते है

लक्षद्वीप के विपरीत अंदमान तथा निकोबार द्वीप समूह के द्वीप बड़े और संख्या में अधिक है

ऊपर वर्णित भारत के भू आकृतिक विभाग एक दुसरे के पूरक है प्रायद्वीपीय भू खंड अचल है इसकी सामग्री से उत्तरी मैदान तथा हिमालय का निर्माण हुआ है यह भारी उद्योगों को आधार प्रदान करने वाले खनिजो का भण्डार है उत्तरी पर्व जल के प्रमुख स्त्रोत है ये पर्वत भारतीय उपमहाद्वीप को हजारो किलोमीटर की दुरी से घेरे हुए हिया उत्तर का मैदान सघन जनसँख्या का क्षेत्र है यह पुरे देश के लिए अनाज का भण्डार हा कुछ हद तक घिरे होने के कारण इस प्रायद्वीप की प्रिथ्कर्ता ने यहाँ के लोगो की एक रूपता को सुदृढ़ बनाने में सहायता की है 
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