मौलिक कर्तव्य | Fundamental Duties in Hindi - Study Hindi


मौलिक कर्तव्य | Fundamental duties | Fundamental duties in Hindi

इस Article को पढने के बाद मौलिक कर्तव्य ( fundamental duties)से जुड़े सारे प्रश्नों के हल मिल जायेंगे जैसे,

मौलिक कर्तव्य क्या है
मौलिक कर्तव्य के महत्व
मूल कर्तव्य की संख्या
संविधान में मूल कर्तव्य कितने है
नागरिक के मूल कर्तव्य निबंध
और ये सभी में Fundamental Duties in Hindi में होंगे




मौलिक कर्तव्य (Fundamental Duties)

भारत के नागरिकों के कृत्यों का उल्लेख अनुच्छेद 51-A में किया गया है। यह प्रावधान 42वें संशोधन द्वारा संविधान में 1976 में सम्मिलित किए गए। संविधान के अनुसार प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य होगा कि वह
1.संविधान का पालन करे और उसके आदर्शों, संस्थाओं, राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रीय गान का आदर करे।
2. स्वतंत्रता के लिए हमारे राष्ट्रीय आंदोलन को प्रेरित करने वाले उच्च आदर्शों को हृदय में संजोए रखे और उनका पालन करे।
3. भारत की प्रभुता, एकता और अखंडता की रक्षा करे। 4. देश की रक्षा करे और आह्वान किए जाने पर राष्ट्र की सेवा करे।
5. भारत के सभी लोगों में समरसता और समान बन्धुत्व की भावना का निर्माण करे जो धर्म, भाषा और प्रदेश या वर्ग पर आधारित मतभेदों से परे हो, ऐसी प्रथाओं का त्याग करे जो स्त्रियों के सम्मान के विरुद्ध हैं।
6. हमारी मिली-जुली संस्कृति की गौरवशाली परंपरा का महत्व समझे और उसका परिरक्षण करे।
7. प्राकृतिक पर्यावरण की, जिसके अंतर्गत वन, झीलें, नदी और वन्य जीव हैं, रक्षा करे और उसका संवर्धन करे तथा प्राणीमात्र के प्रति दया भाव रखे।
8. वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानवतावाद और ज्ञानार्जन तथा सुधार की भावना का विकास करे।
9. सार्वजनिक संपत्ति को सुरक्षित रखे और हिंसा से दर रहे।
10. व्यक्तिगत और सामूहिक गतिविधियों के सभी क्षेत्रों में उत्कर्ष की ओर बढ़ने का सतत प्रयास करे जिससे राष्ट्र निरंतर बढ़ते हुए प्रयल और उपलब्धि की नई ऊंचाई को छू सके।
11. सामाजिक उत्तरदायित्व को दृष्टिगत रखते हए बच्चों को शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराना। यह कर्तव्य 86वें संविधान संशोधन अधिनियम के तहत जोड़ा गया।
यह ध्यान देने योग्य है कि, उपरोक्त कर्तव्यों को कानून द्वारा लागू कराया जा सकता है तथा संसद इन कर्तव्यों और उत्तरदायित्वों को न निभाने के लिए कानून द्वारा दण्ड निश्चित कर सकती है। वास्तव में कर्तव्यों से सम्बन्धित प्रावधानों की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि उनको कहां तक लागू किया जा सकता है। मौलिक कर्तव्यों के संविधान में जोड़े जाने को इसलिए भी उचित ठहराया गया है कि उनसे लोकतंत्र सुदृढ़ हुआ है।


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