भारतीय नागरिक - Study Hindi



इस Article में मैंने indian citizenship के बारे में बताया है जो की भारतीय नागरिक से जुड़ा हुआ है इस Article में indian citizenship से जुड़े संसोधनो को विस्तार से बताया है और नागरिकता का महत्व, भारत की नागरिकता होने की शर्ते, आदि इसमें बताया गया
indian citizenship से जुड़े important topics


  Ø नागरिक कौन है? Who is a Citizen?)
  Ø  नागरिकता प्राप्ति तथा उसका समापन (Acquisition and Termination of Citizenship)
  Ø नागरिकता अधिनियम में संशोधन (Amendment of Citizenship Act)
  Ø राष्ट्रमंडल की नागरिकता (Commonwealth Citizenship)
  Ø इकहरी नागरिकता (Single Citizenship)
  Ø भारतीय मूल के व्यक्तियों के लिए दोहरी नागरिकता (Dual Citizenship for People of Indian Origin)
  Ø प्रवासी भारतीयों को मतदान का अधिकार (Voting Right to NRIs)
  Ø नागरिकता का महत्व (Significance of Citizenship)
  Ø (शादी करके भारतीय नागरिकता)Indian citizenship by mairrage
  Ø (भारतीय नागरिकता नियम)Indian Citizenship Rules
  Ø (भारतीय राष्ट्रीयता कानून)Indian Nationality Law
   
    


नागरिक कौन है? (Who is a Citizen?)

 भारत का संविधान इकहरी नागरिकता प्रदान करता है। देश के सभी भागों में निवास करने वाले सभी व्यक्तियों को भारतीय नागरिकता प्रदान की गई है (अनुच्छेद 5)। भारत में अमरीका की भांति राज्यों को अलग से स्वतन्त्रता उपलब्ध नहीं है। संविधान के अनुसार, निम्न तीन श्रेणी के लोगों को भारत की नागरिकता प्राप्त है
1. वे व्यक्ति जो भारत में निवास करते हैं।
2. पाकिस्तान से भारत आने वाले शरणार्थी।
3. दूसरे देशों में रहने वाले भारतीय प्रवासी।
नागरिकों की श्रेणी में वह सभी लोग आते हैं जो स्थाई रूप से भारत में रहते हैं, जिनके माता-पिता दोनों में से कोई भी एक भारत में पैदा हुआ, वह व्यक्ति जो

संविधान के लागू होने से पूर्व कम से कम 5 वर्ष तक साधारणतया भारत के निवासी थे तथा जिन्होंने किसी अन्य देश की नागरिकता स्वेच्छा से ग्रहण नहीं की।

नागरिकता प्राप्ति तथा उसका समापन (Acquisition and Termination of Citizenship)

भारत की नागरिकता प्राप्त करने तथा खोने सम्बन्धी नियमों का उल्लेख 1955 के नागरिकता अधिनियम में किया गया है। कोई भी व्यक्ति भारत की नागरिकता निम्नलिखित पांच तरीकों से प्राप्त कर सकता है
1.जन्मजात नागरिकता-कोई भी व्यक्ति जो जनवरी 1950 के पश्चात भारतवर्ष में जन्मा हो, भारत का जन्मजात नागरिक माना जाता है।
2.वंशानुगत नागरिकता-कोई भी व्यक्ति जो 26 जनवरी 1950 अथवा उसके पश्चात भारत के बाहर निवास कर रहा है, भारत का नागरिक माना जाता है. यदि उसके जन्म के समय उसका पिता भारत का नागरिक था।
3.पंजीकरण द्वारा नागरिकता-निम्न श्रेणियों के व्यक्तियों को पंजीकरण द्वारा भारत की नागरिकता प्रदान की जा सकती है। यदि वह उचित अधिकारी का प्रार्थनापत्र दे।
 (क) भारतीय मूल के वह व्यक्ति जो प्रार्थनापत्र देने से पूर्व साधारणतया पांच वर्ष तक भारत में निवास कर रहे हैं।
 (ख) भारतीय मूल के वह व्यक्ति जो साधारणतया भारत के बाहर किसी अन्य देश अथवा स्थान पर निवास कर रहे हैं।
 (ग) वह स्त्रियां जो भारत के नागरिकों से विवाहित हैं। (घ) उन व्यक्तियों के अल्प आयु बच्चे जो स्वयं भारत के नागरिक है।
(ङ) राष्ट्र संघ देशों अथवा आयरलैण्ड गणराज्य के वयस्क नागरिका

4. देशीयकरण द्वारा नागरिकता-कोई भी व्यक्ति भारत को नागरिकता देशीयकरण के आधार पर प्राप्त कर सकता है, यदिः
(क) वह किसी ऐसे देश से सम्बन्धित है, जहां पर भारत के नागरिक देशीयकरण की रीति द्वारा वहां के नागरिक बन सकते है।
(ख) अपनी नागरिकता को त्याग देते हैं तथा उस त्याग को सूचना भारत सरकार को देते हैं।
(ग) देशीयकरण द्वारा नागरिकता प्राप्त करने सम्बन्धी प्रार्थनापत्र देने
स पर्व व्यक्ति देश में 12 मास से निवास कर रहा है अथवा
सरकारी नौकरी कर रहा है।
(घ) चरित्रवान हो।
(ङ) भारत की भाषा की व्यावहारिक जानकारी रखता है।
(च) देशीयकरण द्वारा नागरिकता प्राप्त करने के पश्चात वह देश में निवास करना चाहता है अथवा सरकारी पद पर कार्य करना चाहता है।
 यहां पर यह स्पष्ट कर देना आवश्यक है कि भारत सरकार किसी भी ऐसे व्यक्ति को जिसने दर्शन, विज्ञान, कला, साहित्य, विश्व शान्ति इत्यादि के क्षेत्र में श्रेष्ठ सेवा प्रदान की हो, उपरोक्त शर्तों में से किसी एक अथवा सभी शतों से मुक्त कर सकती है।
5.क्षेत्र के विलय के फलस्वरूप-यदि भारत के साथ किसी नए क्षेत्र का विलय होता है तो भारत सरकार यह स्पष्ट कर सकती है कि उस क्षेत्र में रहने वाले कौन से व्यक्ति, उस क्षेत्र से सम्बन्धित होने के कारण, भारत के नागरिक स्वीकार किए जा सकते हैं।
नागरिकता का पर्यावसान तीन प्रकार से हो सकता है:
(क) कोई भी नागरिक अपनी स्वेच्छा से नागरिकता त्याग सकता है परंतु ऐसा करने के लिए उसे निर्धारित फार्म पर आवश्यक घोषणापत्र पर हस्ताक्षर करने पड़ते हैं, प्राय: नागरिकता उन्हीं

नागरिकों द्वारा त्यागी जाती है जो किसी अन्य देश के नागरिक
बनना चाहते है।
(ख) नागरिकता का स्वेच्छा से भी पर्यवसान किया जा सकता है यदि
कोई नागरिक किसी अन्य देश की नागरिकता को नागरिकीकरण,
पंजीकरण या अन्यथा ग्रहण कर ले।
(ग) केन्द्र सरकार किसी भी नागरिक को उसकी नागरिकता से वंचित कर सकती है यदि उसे विश्वास हो जाये कि उसने नागरिकता धोखाधड़ी या गलत तथ्य देकर अथवा भौतिक तथ्यों को छिपाकर प्राप्त की है। यदि कोई नागरिक देश के संविधान के प्रति अनिष्टता दर्शाता है अथवा युद्ध के समय किसी दुश्मन देश के साथ व्यापार करता है तो भी उसको नागरिकता से वंचित किया जा सकता है। यदि किसी व्यक्ति ने जिसे नागरिकता प्राप्त किए पांच वर्ष से कम समय हुआ है और उसे दो वर्ष अथवा उससे अधिक समय के लिए कारावास का दंड दिया गया है तो भी उसकी नागरिकता समाप्त की जा सकती है। यदि कोई व्यक्ति सात वर्ष से अधिक समय से विदेश में रहा रहा है तो भी केन्द्र सरकार उसकी नागरिकता समाप्त कर सकती है।

नागरिकता अधिनियम में संशोधन (Amendment of Citizenship Act)

1986 में नागरिकता अधिनियम में एक संशोधन किया गया जिसके फलस्वरूप बांगला देश, श्रीलंका अथवा अन्य देशों से आने वाले शरणार्थियों के लिए नागरिकता को मुश्किल बना दिया गया। इस संशोधन द्वारा प्रावधान किया गया कि कोई भी व्यक्ति जिसका जन्म भारतवर्ष में 26 जनवरी 1950 को अथवा उसके पश्चात, परंतु 26 नवंबर 1986 से पूर्व हुआ अथवा इस संशोधन नियम के लाग होने के पश्चात हआ। तो उन्हें अधिकारिक रूप से नागरिकता तभी प्राप्त होगी यदि उनके जन्म के समय उनके माता-पिता में से एक भारत का नागरिक था। इस संशोधन द्वारा नगारिकता प्राप्त करने के लिए पंजीकरण की अवधि को 6 मास से बढ़ाकर 5 वर्ष कर दिया गया।
दिसम्बर 2003 में नागरिकता अधिनियम 1955 में संशोधन किया गया जिसके अन्तर्गत भारतीय नागरिकों अथवा पूर्व नागरिकों के बच्चों को पुन: नागरिकता प्राप्त करने की सुविधा दी गई परन्तु, इस अधिनियम के अन्तर्गत नागरिकता तथा नागरिकीकरण द्वारा नागरिकता प्राप्त करने की प्रक्रिया अधिक सख्त बना दी गई ताकि अवैध रूप से भारत में आज व्यक्तियों को भारत की नागरिकता प्राप्त करने से रोका जा सके।

राष्ट्रमंडल की नागरिकता (Commonwealth Citizenship)

प्रत्येक राष्ट्रमंडल नागरिक को भारत में राष्ट्रमंडल नागरिक के अधिकार प्राप्त हैं। भारतीय नागरिकता अधिनियम 1955, केन्द्र सरकार को अधिकार प्रदान करता है कि यह भारतीय नागरिकों को प्राप्त कुछ अथवा सभी अधिकार राष्ट्रमंडल देशों के नागरिकों को लेन-देन के सिद्धान्त के आधार पर प्रदान कर सकती है।

इकहरी नागरिकता (Single Citizenship)

भारतीय नागरिकता की एक अन्य विशिष्टता यह है कि यह केवल इकहरी नागरिकता के सिद्धान्त को स्वीकार करता है। इसका अभिप्राय यह है कि अन्य संघीय देशों की भांति यहां पर राज्यों की अलग नागरिकता नहीं है। इसके विपरीत भारत के सभी नागरिकों को चाहे वह देश के किसी भी भाग में निवास करते हों, समान अधिकार तथा विशेषाधिकार प्राप्त है।

भारतीय मूल के व्यक्तियों के लिए दोहरी नागरिकता (Dual Citizenship for People of Indian Origin)

अनुच्छेद 5,6 और 8 के अधीन आने वाला व्यक्ति भारत का नागरिक नहीं रहेगा यदि वह किसी विदेशी राज्य की नागरिकता स्वेच्छा से अर्जित कर लेता है।वह एक ही समय दो राज्यों अर्थात देशों का नागरिक नहीं हो सकता। कुछ वर्षों से भारतीय मूल के लोगों को, जो विदेशी नागरिक बन गए हैं, भारत की नागरिकता का विकल्प दिया गया है। किंतु यह पाकिस्तान, बांग्लादेश आदि पर लागू नहीं होता है।
2 दिसम्बर, 2005 को बने एक कानून के अनुसार सभी प्रवासी भारतीयों (पाकिस्तान एवं बांग्लादेश को छोडकर) को दोहरी नागरिकता प्रदान करने का प्रावधान किया गया है। इस कानून के अनुसार एक विदेशी नागरिक, जो-
(i)26 जनवरी, 1950 को भारत का नागरिक बनने की योग्यता रखता हो, या
(ii) वह 26 जनवरी, 1950 को अथवा उसके बाद भारत का नागरिक हो, या
(3) 15 अगस्त, 1947 के बाद भारत में शामिल होने वाले किसी भाग का निवासी हो, या (iv) वह या उसके बच्चे या पोते-पोतियों, या
(v) इस प्रकार के व्यक्ति के नाबालिग बच्चे; को भारत सरकार द्वारा दोहरी नागरिकता प्रदान की जाएगी।

यद्यपि यदि आवेदक पाकिस्तान एवं बांग्लादेश का नागरिक है तो उसे इस योजना के अंतर्गत प्रवासी भारतीय नागरिकता (ओसीआई) प्राप्त करने का अधिकार नहीं होगा। इससे पूर्व 2004 में यह सुविधा विश्व के केवल 16 देशों-ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, फिनलैंड, फ्रांस, ग्रीस, आयरलैण्ड, इजरायल, इटली, नीदरलैण्ड न्यूजीलैण्ड पुर्तगाल, साइप्रस, स्वीडन, स्विट्जरलैण्ड, इंग्लैण्ड तथा अमेरिका के अनिवासी भारतीयों के लिए ही थी, किंतु अब सम्पूर्ण विश्व के (पाकिस्तान एवं बांग्लादेश को छोड़कर) प्रवासी भारतीयों को इस कानून के अंतर्गत लाया गया है।

प्रवासी भारतीयों को मतदान का अधिकार (Voting Right to NRIs)

फरवरी 2006 में जन प्रतिनिधित्व अधिनियम में संशोधन कर प्रवासी भारतीयों को संसद तथा राज्य विधान सभाओं में मत देने का अधिकार प्रदान किया गया। इस अधिनियम के द्वारा प्रवासी भारतीयों में अपने देश के प्रति और अधिक निकटता बढ़ेगी, और वह विदेशों में भी रहकर अपने देश से जुड़े रहेंगे।

नागरिकता का महत्व (Significance of Citizenship)

नागरिकता का महत्व इस बात से स्पष्ट है कि संविधान द्वारा प्रदत्त सभी मौलिक अधिकार केवल नागरिकों को ही प्राप्त हैं। इसके अतिरिक्त केवल नागरिक ही संसद व विधान सभाओं के चुनावों में भाग ले सकते हैं। नागरिकों को इन संस्थाओं की सदस्यता के लिए चुनाव लड़ने का भी अधिकार है। इसके अतिरिक्त कुछ महत्वपूर्ण -पदों, जैसे-राष्ट्रपति, उप-राष्ट्रपति, सर्वोच्च न्यायालय व उच्च न्यायालय के न्यायाधीश इत्यादि पर केवल नागरिक ही नियुक्त हो सकते हैं। अधिकारों के अतिरिक्त नागरिकों के अनेक महत्वपूर्ण कर्तव्य भी हैं, जैसे-देश की रक्षा करना, कर अदा करना, देश की एकता और अखंडता की रक्षा करना, इत्यादि।

                                           



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